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एफआईआर (FIR) कैसे दर्ज करें

एफआईआर (FIR) कैसे दर्ज करें: स्टेप बाय स्टेप गाइड किसी भी अपराध की रिपोर्ट दर्ज कराना एक महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार है। 1 जुलाई 2023 से भारतीय न्याय प्रणाली में बड़े बदलाव किए गए हैं और भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (IEA) को नए कानूनों से बदल दिया गया है। अब एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के तहत आती है। इस ब्लॉग में हम बताएंगे कि नए कानूनों के अनुसार एफआईआर कैसे दर्ज करें, क्या प्रक्रियाएं बदली हैं, और पुलिस के इनकार करने पर क्या करें। Supreme Court of India एफआईआर (FIR) क्या है? एफआईआर (First Information Report) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत दर्ज की जाती है। यह किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की पहली सूचना होती है, जिसे पुलिस दर्ज करके जांच शुरू करती है। एफआईआर दर्ज करने के लिए आवश्यक चीजें शिकायतकर्ता का नाम, पता और संपर्क नंबर घटना का सही समय, तारीख और स्थान घटना का संक्षिप्त विवरण यदि कोई गवाह हो त...

FIR से चार्जशीट तक: पुलिस जांच प्रक्रिया और नागरिकों के अधिकार

पुलिस जांच प्रक्रिया: आपके अधिकार और कर्तव्य  भारत में पुलिस की जांच प्रक्रिया अपराधों की जाँच और न्याय दिलाने का एक महत्वपूर्ण चरण है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 2023 के तहत पुलिस की जांच प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इस लेख में हम पुलिस की जांच के विभिन्न चरणों, एफआईआर दर्ज करने से लेकर चार्जशीट दाखिल करने तक की प्रक्रिया को विस्तार से समझेंगे। साथ ही, नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य भी जानेंगे, ताकि हर व्यक्ति कानूनी रूप से जागरूक रह सके। पुलिस जांच प्रक्रिया के चरण 1. एफआईआर (First Information Report) दर्ज करना एफआईआर पुलिस जांच की पहली और महत्वपूर्ण कड़ी होती है। एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया: ✔️ पीड़ित या कोई अन्य व्यक्ति अपराध की जानकारी पुलिस को दे सकता है। ✔️ संज्ञेय अपराधों में पुलिस मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना एफआईआर दर्ज कर सकती है। ✔️ असंज्ञेय अपराधों में मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होती है। ✔️ एफआईआर दर्ज होने के बाद उसकी एक प्रति पीड़ित को निःशुल्क दी जाती है। ➡...

संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध में अंतर: पूरी जानकारी ,BNS & BNSS 2023 के अनुसार

संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध में अंतर – पूरी जानकारी  भारत में अपराधों को उनकी गंभीरता के आधार पर संज्ञेय (Cognizable) और असंज्ञेय (Non-Cognizable) अपराधों में विभाजित किया जाता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के लागू होने के बाद, इन अपराधों की परिभाषा और प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए गए हैं। इस लेख में हम इन दोनों प्रकार के अपराधों के बीच का अंतर, उनकी विशेषताएँ और एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया को विस्तार से समझेंगे। संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) क्या होता है? संज्ञेय अपराध वे होते हैं जिनमें पुलिस को मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना ही एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी करने का अधिकार होता है। ये अपराध गंभीर माने जाते हैं और समाज पर व्यापक प्रभाव डालते हैं। संज्ञेय अपराधों के उदाहरण (BNS 2023 के अनुसार) अपराध संबंधित धारा (BNS 2023) संभावित सजा हत्या धारा 101 आजीवन कारावास या मृत्यु दंड बलात्कार धारा 63 न्यूनतम 10 साल की सजा अपहरण धारा 111 7 साल या अधिक की सजा डकैती धारा 303 कठोर कारावास हिंसा और दंगे धारा 183 7 साल या अधिक की सजा संज्ञेय अप...