सोशल मीडिया पर अश्लीलता, नाबालिगों की प्रस्तुतिकरण और बाल अधिकारों पर प्रभाव: शादाब जकाती केस का उदाहरण आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। यह प्लेटफ़ॉर्म लोगों को अपने विचार, कला, मनोरंजन और ज्ञान साझा करने का अवसर देता है। हालांकि, सोशल मीडिया का दुरुपयोग भी बढ़ रहा है। कई कंटेंट क्रिएटर्स केवल व्यूज़, लाइक्स और फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए अश्लीलता और यौन सामग्री का उपयोग करते हैं। इसमें नाबालिग बच्चों को शामिल करना, उनके अधिकारों का उल्लंघन करना और समाज में गलत संदेश फैलाना शामिल है। हालिया शादाब जकाती केस इसका सबसे जीवंत उदाहरण है। इस लेख में हम इन पहलुओं को विस्तार से समझेंगे। 1. सोशल मीडिया पर अश्लीलता का बढ़ता प्रयोग सोशल मीडिया पर व्यूज़ और लोकप्रियता पाने के लिए कई बार अश्लील और यौन सामग्री का प्रयोग किया जाता है। यह न केवल बच्चों और किशोरों के लिए अनुचित उदाहरण पेश करता है बल्कि समाज में भी गलत संदेश फैलाता है। युवा वर्ग पर प्रभाव: बच्चे और किशोर सोशल मीडिया पर मौजूद अश्लील सामग्री से मानसिक रूप से प्रभावित हो सकते हैं। सामाजि...
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